Visit us to know about Desi upchar, Gharelu Nuskhe, dadi maa ke upchar in hindi. Get information about Ayurvedic nuskhe, ayurvedic upchar in hindi

Tuesday, 15 January 2019


किडनी स्टोन यानी पथरी के बारे में तो आप सब जानते है, इस तनाव भरी जिन्दगी में ये आम समस्या हो गई है. लेकिन क्या कभी आपने मुहं की पथरी (salivary stone) के बारे में सुना है? डॉक्टर के मुताबिक, किडनी, गालब्लैडर और पैंक्रियाज की तरह मुंह में होने वाली पथरी भी आपके लिए घातक हो सकती है. हालांकि यह बहुत रेयर कंडीशन में होती है. फिर भी इसके बारे में जानना बेहद जरुरी है, तो चलिए जानते है, ये कैसे होती है?
मनुष्य के मुंह में मौजूद लार ग्रंथि में कैल्शियम फॉस्फेट धीरे-धीरे जमा होकर पथरी में बदल जाता है, जोकि बहुत खतरनाक हो सकता है. लेकिन आप इस बीमारी को पहचान कर अपने मुहं को सुरक्षित रख सकते है. मानव के मुंह और गले में 6 ग्रंथियां होती है, और इनमे से कान के नीचे पेरोटिड ग्रंथि और जबड़े के सबमेंडुलर लार ग्रंथि (salivary stone) में पथरी होने की सम्भावना होती है. और ये इन ग्रंथियों में कैल्शियम फास्फेट के जमने के कारण होता है.
बता दे कि मुंह में पथरी होने पर आपकी लार का बहना बंद हो जाता है. साथ ही पथरी होने पर जबड़े और कान के आस-पास सूजन, खाना खाने में प्रॉब्लम और जबड़े में दर्द शुरू हो जाता है. आपके मुंह में पथरी (salivary stone) होने पर मुंह के कैंसर और दिमारी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है. इस पथरी का इलाज करवाने के बाद भी व्यक्ति भोजन के दौरान होने वाले दर्द को नहीं भूल पाता. चिकित्सा की भाषा में इसे "मील टाइम सिंड्रोम" भी कहते है.

कैसे करें salivary stone बचाव?

  1. जो लोग कम पानी पीते है और चबाकर खाना नहीं खाते है, उनको ये बीमारी हो सकती है. इसलिए इस बीमारी से बचने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं और खाना हमेशा चबाकर खाएं.
  2. मुहं की पथरी (salivary stone) का पता आपक एक्सरे और सीटी स्कैन से लगा सकते है. यदि ग्रंथि के अंदर पथरी है तो इसे ऑपरेशन से निकाला जाता है.
  3. आपको इस बीमारी से बचने के लिए रोजाना कम से कम 7-8 ग्लास पानी पीना चाहिए. इससे आपकी लार ग्रंथि में पथरी होने की सम्भावना कम हो जाती है.
  4. जब आपको मुंह में सूजन, दर्द और लार नहीं बनती है तो तुंरत डॉक्टर को दिखाएं. पथरी (salivary stone) बढ़ी न होने पर आप कैंसर जैसी घातक बीमारी के खतरे से बच सकते है.
  5. मुहं ही पथरी से बचने के लिए आप डॉक्टर से अपने मुंह का रेगुलर चेक अप भी करवाते रहे, ताकि आपका मुंह स्वस्थ और अन्य बीमारियों से दूर रहे.

Wednesday, 28 March 2018

एलोवेरा एक बेहद गुणकारी पौधा होता है। इसके ढेर सारे गुणों के कारण ही कुछ लोग इसे संजीवनी भी कहते हैं। आयुर्वेद में शरीर की 200 से ज्यादा परेशानियों में एलोवेरा के प्रयोग को कारगर माना गया है। एलोवेरा को ग्वारपाठा, क्वारगंदल, घृतकुमारी, कुमारी, घी-ग्वार इत्यादि से पुकारा जाता है। बाजार में मौजूद ढेर सारे स्किन केयर, हेयर केयर, पेन किलर बाम आदि में एलोवेरा का प्रयोग किया जाता है। शरीर को बीमारियों से दूर रखने के लिए भी लोग एलोवेरा जूस पीते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि एलोवेरा जेल के प्रयोग से सिर दर्द में भी राहत पाई जा सकती है।

सिर दर्द के लिए एलोवेरा का प्रयोग

एलोवेरा में ढेर सारे एंटीऑक्सिडेट्स और मिनरल्स होते हैं। इसमें मौजूद कई तत्व दर्द और सूजन को दूर करने में मददगार होते हैं। सिर दर्द में एलोवेरा जेल के प्रयोग से राहत मिलती है क्योंकि इसमें एंटी-इंफ्लामेट्री और पेन रिलीविंग गुण होते हैं। एलोवेरा मांसपेशियों की अकड़ को कम करता है और नसों को रिलैक्स करता है। रोजाना 5 मिलीग्राम एलोवेरा जूस के सेवन से तनाव, दर्द और इंफेक्शन की समस्या दूर होती है।

कैसे करें प्रयोग

सिर दर्द की समस्या को तुरंत ठीक करने के लिए सबसे पहले एक कटोरी में चार चुटकी हल्दी लीजिए और इसमें आधा चम्मच एलोवेरा जेल और दो बूंद लौंग का तेल मिला लीजिए। अब इसे अच्छी तरह मिलाकर माथे और सिर पर लगाइये। लगाने के 10-15 मिनट में ही आपका सिर दर्द पूरी तरह ठीक हो जाएगा क्योंकि एलोवेरा जेल सिर को ठंडक पहुंचाता है और मांसपेशियों को रिलैक्स होने में मदद करता है। इसके अलावा आप चाहें तो अपने डेली बाम में भी एलोवेरा जेल को मिलाकर लगा सकते हैं।

हीमोग्लोबिन की कमी में

एलोवेरा औषधि हर उम्र के लोग इस्तेमाल कर सकते हैं और यह शरीर में जाकर खराब सिस्टम को ठीक करता है। इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। साथ ही एलोवेरा का जूस ब्लड को प्यूरीफाई करता है और हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करता है। इसके अलावा यह शरीर में व्‍हाईट ब्लड सेल्स की संख्या को बढ़ाता है।

त्‍वचा और बालों के लिए लाभकारी

त्वचा की देखभाल और बालों की मजबूती व बालों की समस्या से निजात पाने के लिए एलोवेरा एक संजीवनी का काम करती है। एलोवेरा का जूस त्वचा की नमी को बनाए रखता है जिससे त्वचा स्‍वस्‍थ दिखती है। यह स्किन के कोलाजन और लचीलेपन को बढाकर स्किन को जवान और खूबसूरत बनाता है। एलोवेरा का जूस पीने से त्वचा की खराबी, मुहांसे, रूखी त्वचा, धूप से झुलसी त्‍वचा, झुर्रियां, चेहरे के दाग धब्बों, आंखों के काले घेरों को दूर किया जा सकता है।

एलोवेरा जेल के प्रयोग में बरतें सावधानी

आपने एलोवेरा को तोड़ने के दौरान उसमें से निकलते हुए पीले पदार्थ को देखा होगा। इस पीले पदार्थ को एलो लेटेक्स कहते हैं। विशेषज्ञों की माने तो एलोवेरस से निकालने वाला यह पीले रंग को लेटेक्‍स टॉक्सिक होता है। इसके टॉक्सिक कैंसर जैसी घातक बीमारी का कारण बनते हैं। इसे इस्‍तेमाल करने के लिए एलोवेरा की पत्‍ती को तोड़कर कुछ देर के लिए ऐसे ही छोड़ दें। कुछ देर बाद इसका पीला पदार्थ यानी लेटेक्‍स पूरी तरह से निकाल जायें तो इसे अच्‍छे से धोकर इस्‍तेमाल करें।
अक्सर लोगों को एड़ियों के फटने की शिकायत होती है। दरअसल, एड़ियों यानि कि पैरों के तलवे फटने के कई कारण होते हैं। अगर देखा जाए तो ये धूल-मिट्टी के संपर्क में अधिक रहने के चलते फटती हैं। ये सब भी सच है कि जितना व्यक्ति अपने अन्य अंगों का ध्यान रखता है उतना एड़ियों का नहीं रखते हैं। हमारी इस अनदेखी की वजह से अक्सर एड़ियां फटने लगती हैं। ये समस्या सर्दियों में अधिक बढ़ जाती है। एड़ी फटने के कई कारण हो सकते हैं। शरीर में खुश्की के ज्यादा बढ़ जाने, नंगे पैर कठोर फर्श पर चलने, खून की कमी होने, अधिक ठंड के प्रभाव और धूल-मिट्टी की वजह से एड़ियां फट जाती हैं। फटी हुई एड़ियों का अगर जल्द से जल्द ख्याल न रखा गया, तो वो और ज्यादा फट सकती हैं। उनसे खून आने लगता है और काफी दर्द भी होता है। फटी एड़ियों को ठीक करने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे काफी कारगर साबित होते हैं। आज हम आपको इन्हें सही करने के लिए एक जबरदस्त नुस्खा बता रहे हैं। 

कैसे बनता है ये नुस्खा

इस नुस्खे को बनाने के लिए आपको ज्यादा परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। आप बस एक बर्तन में नीम के तेल को रखना है और फिर उसमें हींग का बारीक पेस्ट बनाकर डाल लें। अब इसे एड़ियों में लगा लें और पैरों में पोलेथीन बांधकर सो जाए। जिससे आपकी चादर खराब न हो। आप देखेंगे कि आपको सुबह उठकर ही आराम मिलेगा। इसे ट्राई करने के बाद आप खुद महसूस करेंगे कि फटी एड़ियों के लिए हींग का नुस्खा बहुत ही कारगार और बनाने में भी बहुत आसान है। कोई भी व्यक्ति इसे आसानी से अपने घर में बना सकते हैं। अगर आपकी एड़ियां सही हैं लेकिन आपके परिवार में किसी को इस तरह की शिकायत है तो आप उन्हें भी ये बता सकते हैं।

ये नुस्खे भी है कारगार

  • शहद प्राकृतिक रूप से त्वचा को नमी प्रदान करता है। शहद में ऐंटी-बैक्टीरिअल तत्व भी पाए जाते हैं। फटी एड़ियों के इलाज में शहद बेहत ताकतवर नुस्खा है। एक बाल्टी गर्म पानी में आधा कप शहद मिलाएं। इसमे अपनी एड़ी को करीब 20 मिनट तक रखें। उसके बाद एड़ियों को धोकर किसी क्रीम से मसाज कर लें। 
  • ग्लिसरीन और गुलाब जल को एक साथ मिलाकर उसमें एड़ी भिगोएं। ग्लिसरीन और गुलाब जल से फटी एड़ियों को फौरन राहत मिलेगी। इसमें नींबू और नमक भी मिला सकते हैं। इससे एड़ी में काले धब्बे साफ हो जाएंगे। इस घोल में अपनी एड़ी को 20 मिनट तक रखें। इससे त्वचा का कठोर हिस्सा कोमल होता है। इस घोल का इस्तेमाल कुछ दिनों तक रोज जारी रखें।
  • फटी एड़ियों को सही करने के लिए यह सबसे सस्ता और आसान उपाय है। पके केल के गूदे को मसल लें और फिर से फटी एड़िओं पर लगाएं। 20 मिनट बाद इसे धो डालें। साफ करते वक्त साबुन का इस्तेमाल नहीं करें।
  • फटी एड़ियों को ठीक करने में मोम और नारियल तेल का जबर्दस्त असर होता है। यदि आप फटी एड़ियों के दर्द से पीड़ित हैं तो मोम और नारियल के मिश्रण से आपको काफी राहत मिलेगी।
  • बालों को लंबा और घना बनाने के लिए तो अरंडी के तेल के इस्तेमाल के बारे में सभी जानते हैं। लेकिन फटी हुई एड़ियों के लिए भी यह बहुत लाभकारी होता है। पैरों को गर्म पानी से धोकर उनमें अरंडी का तेल लगाने से फटी एड़ियां ठीक हो जाती हैं।
गर्मियां शुरू होते ही शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। जैसे-जैसे वातावरण का तापमान बढ़ता है लोग चिलचिलाती गर्मी और धूप से परेशान होने लगते हैं। इस दौरान लू भी तेज चलती है जिसके कारण कई तरह की संक्रामक बीमारियां फैलने लगती हैं। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्‍यम से बताएंगे कि गर्मी में किन बीमारियों का खतरा ज्‍यादा रहता है और इनसे बचाव कैसे कर सकते हैं।

खसरा

खसरा या मोजल्‍स एक सामान्‍य संक्रामक बीमारी है। इसका असर इंफेक्‍शन होने के कई दिन बाद दिखाई देता है। ये बीमारी परायोक्‍स वायरस से फैलता है। ये वायरस तभी अटैक करता है जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। जब यह बीमारी किसी व्‍यक्ति को प्रभावित करती है तो उसके शरीर में कई तरह के लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जैसे शरीर का टूटना, थकान, चिड़चिड़ापन आदि। इसके अलावा पूरे शरीर में लाल रंग के दाने पूरे शरीर में उभरने लगते हैं साथ ही तेज बुखार भी होता है। आंखों में लाली, चिपचिपापन, सूजन, पानी निकलना ओर खुजली आम लक्षण हैं।
इस बीमारी से बचने के लिए मरीज को रोजाना ताजे पानी और बिना साबुन के नहलाना चाहिए। रोजाना कपड़े बदलें और कपड़े ढीले, सूती और सफेद होने चाहिए। इससे बचने के लिए बच्चों को एमएमआर टीके लगाये जाते है जिसे यह बीमारी जल्दी ठीक हो जाती है।

पीलिया

पीलिया या जॉन्डिस रोग विशेष तरह के विषाणु से फैलता है। यह पहले लीवर और उसके बाद पूरे शरीर में फैलने लगता है। इसके सामान्‍य लक्षणों की बात करें तो इसमें रोगी की आंखों का सफेद भाग पीला पड़ जाता है। यूरीन का रंग भी पीला होने के साथ बेहद कमजोरी आ जाती है। इसके अलावा जी मिचलाना, सिरदर्द, भूख न लगना आदि कई तरह की समस्‍याएं होने लगती हैं। भूख कम और मिचलिया-उबकाईयॉं आती रहती हैं, कुछ मामलों में उल्टी भी हो जाती हैं। कभी पतले दस्त आते हैं, कभी पेट फूल जाता है और मल में बदबू आती है। नब्ज धीमी गति से चलती है। एक मिनट में 30-40 बार तक धीमी हो जाती है। रोगी को नींद नहीं आती और कमजोरी आ जाती है। रोग पुराना हो जाने पर शरीर में भयानक रूप से खुजली हो जाती है।
इससे बचाव किया जा सकता है। इसके लिए पानी उबालकर पीना चाहिए। साथ ही पानी की दूषित होने से बचाना चाहिए। चलती फिरते रहने से वायरस का दुष्प्रभाव लिवर पर अधिक पड़ता है इसलिए रोगी को कम से कम चलना फिरना चाहिए। इस रोग में लिवर कोशिकाओं में ग्लाइकोजन तथा रक्त प्रोटीन की मात्रा घट जाती है इसलिए कोई हल्का प्रोटीन भोजन जैसे मलाईरहित दूध या प्रोटीनेक्स, कार्बोहइड्रेट की अधिकता वाला भोजन रोगी को पर्याप्त मात्रा में देना चाहिए।

चिकन पॉक्स

चिकन पॉक्स का रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तो इस रोग को ठीक होने में 10-15 दिन लग जाते हैं। लेकिन इस रोग में चेहरे पर जो दाग पड़ जाते हैं उसे ठीक होने में लगभग 5-6 महीने का समय लग जाता है। यदि इस रोग का उपचार जल्दी ही न किया जाए तो इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। यह बीमारी वरिसेल्ला जोस्टर वायरस के कारण होती है। इसके सामान्‍य लक्षणों की बात करें तो इस बीमारी में पूरे शरीर में लाल चकत्ते (दाने) और खुजली होना। शरीर में पड़े छालों का फट जाना। बुखार, बदन दर्द और उल्टी आना।
चिकन पॉक्स से बचने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है खान-पान का ध्यान रखें। खुले में रखा खाद्य पदार्थ बिल्कुल भी न लें। जब तक यह बीमारी पूरी तरह ठीक ना हो जाये तब तक उस मरीज़ को सबसे दूर रखें क्यों कि यह बीमारी छूने से फैलती है। और अगर हालत ज्यादा ख़राब हो जाये तो तुरंत अपने चिकित्सक से मिले।

गलसुआ

गलसुआ शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। गलसुआ को कंडमाला रोग भी कहते हैं। ये एक संक्रामक रोग है जो ज्यादातर गाल के नीचे जबड़ों के पास स्थित पेरोटिड ग्रंथियों में संक्रमण के फैलने से होता है। ये ग्रंथियां लार बनाती हैं। संक्रमण के कारण इस रोग में गालों में सूजन आ जाती है। इस रोग के लक्षण बहुत बाद में दिखते हैं। गलसुआ के लक्षण शुरूआत में नजर नहीं आते हैं। वायरस के संपर्क में आने के लगभग 15 से 20 दिन बाद इसके लक्षण दिखना शुरू होते हैं। गलसुआ के ज्यादातर लक्षण टॉन्सिल से मिलते हैं इसलिए बहुत से लोग टॉन्सिल और गलसुआ में अंतर नहीं कर पाते हैं। बुखार, सिरदर्द, भूख न लगना, कमज़ोरी, चबाने और निगलने में दर्द होना और गालों में सूजन आदि लक्षण गलसुआ के भी हैं और टॉन्सिल के भी हैं।
कई बार सिर्फ एक तरह की ही ग्रंथि में सूजन आती है। इसके रोगियों को पेट में तेज दर्द और उल्टी की समस्या हो जाती है। गलसुआ होने पर गालों की बर्फ या फ्रोजन मटर से सिंकाई की जाती है। इसके अलावा गलसुआ चूंकि शरीर में वायरस के प्रवेश से होता है इसलिए इस रोग में खूब पानी पीने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा गलसुआ होने पर गर्म पानी का गरारा करने से भी दर्द में आराम मिलता है। इसमें रोगी को अम्लीय पदार्थों व फलो के रस का सेवन करने से बचना चाहिए।

हीट स्‍ट्रोक


हीट स्ट्रोक को उष्माघात भी कहा जाता है। यह ऐसी अवस्‍था है जिसमें पीड़ित के शरीर का तापमान अत्यधिक धूप या गर्मी की वजह से बढ़ने लगता है। हीट स्ट्रोक तेज धूप या अत्यधिक गर्मी/तापमान के कारण होता है। लेकिन हीट स्ट्रोक के और भी कई कारण होते हैं। निर्जलीकरण, थाइरोइड में असंतुलन 
संभव हो तो आंखों पर धूप से बचने वाला चश्मा भी लगा लें। निर्जलीकरण से बचने के लिए यह अति आवश्यक है कि आप खूब मात्रा में पानी पीते रहें। अक्सर लोग तभी पानी पीते है जब उन्हें प्यास लगती है लेकिन ऐसा करना हर दृष्टि से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद नहीं है। पानी न सिर्फ आपकी प्यास बुझाता है बल्कि यह आपके शरीर के भीतर के विषैले पदार्थों को भी बाहर निकालता है। पानी की कमी से आपकी त्वचा बेजान लगने लगती है एवं आपके बाल कमजोर होकर झड़ने लगते है।

Tuesday, 18 July 2017

स्लिम और फिट व्‍यक्ति को देखकर आपको भी थोड़ी बहुत ईर्ष्‍या तो जरूर होती होगी। आपके मन में भी होता होगा कि आप भी क्‍यों न फिट रहें। तो अगर आप भी स्लिम-ट्रिम और फिट दिखना चाहते हैं? तो इन 5 टिप्‍स को अजमाइए और स्‍वस्‍थ्‍य जीवन पाइए।
  • 1

    ब्रेकफास्‍ट में शामिल करें ये फूड

    फिट रहने वाले प्रतिदिन सुबह ब्रेकफास्‍ट जरूर करते हैं। नाश्‍तें में दही, फ्रूट जूस, अंडे, बादाम आदि का को शामिल करें। यह आपको पूरे दिन ताकत मिलेगी और आप फिट रहेंगे। खाने में प्रोटीन युक्‍त फूड का सेवन आपकी मसल्‍स को बनाएगा और स्लिम रखेगा।
    Image Source : Getty
    ब्रेकफास्‍ट में शामिल करें ये फूड



  • 2

    खाने में लें हाईफाइबर फूड

    स्लिम-ट्रिम और फिट रहने के लिए ऑयली चीजों के बजाए हाईफाइबर फूड लेना चाहिए। पत्‍तागोभी, फूलगोभी, पालक, मेथी, चना, मूंग आदि फूड फाइबर युक्‍त होते हैं। ऐसे आहार का सेवन जरूर करना चाहिए।
    Image Source : Getty
    खाने में लें हाईफाइबर फूड



  • 3

    ग्रीन टी या ब्‍लैक कॉफी

    फिट रहने वाले लोग सुबह की चाय में दूध और शक्‍कर को अवॉइड करते हैं, इसकी जगह ब्‍लैक कॉफी या ग्रीन टी लेते हैं। इस बॉडी बॉडी मेनटेन रहती है। इसके अलावा शरीर को डिटॉक्‍स करने के लिए पानी का भरपूर सेवन करें।
    Image Source : Getty
    ग्रीन टी या ब्‍लैक कॉफी






  • 4

    लें भरपूर नींद

    अगर आप जिम करते हैं या कोई भी शारीरिक मेहनत करते हैं तो भी भरपूर नींद लेना जरूरी होता है। कम से कम 7 घंटे की नींद लेनी चाहिए। इससे भूख बढ़ाने वाले हॉर्मोन्‍स का लेवल कम होता है।
    Image Source : Getty
    लें भरपूर नींद


  • 5

    रेगुलर एक्‍सरसाइज

    फिट रहने के लिए प्रतिदिन एक्‍सरसाइज जरूर करना चाहिए। इससे शरीर का ब्‍लड सर्कुलेशन सही रहेगा। इसके अलावा तनाव मुक्‍त रहने के लिए योग, प्रणायाम करें। अगर आप फिट रहना चाहते हैं तो इन टिप्‍स को जरूर अपनाएं।
    Image Source : Getty
    रेगुलर एक्‍सरसाइज
बढ़ते प्रदूषण, आहार में पोषक तत्‍वों की कमी, तनाव आदि के चलते हमें स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। इसका असर हमारी सेहत के साथ-साथ बालों पर भी पड़ता है। ऐसी ही एक परेशानी है, समय से पहले बालों का सफेद होना। बालों के सफेद होने की समस्‍या अब छोटी उम्र में भी होने लगी हैं।

अगर आपके बाल भी उम्र से पहले सफेद होने लगे हैं और आप इस बात को लेकर हमेशा तनाव में रहते हैं तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं हैं क्‍योंकि हम आपके लिए लाये हैं एक ऐसा उपाय जिसके इस्‍तेमाल से आप सफेद बालों की समस्‍या से बच सकते हैं। लेकिन इस घरेलू उपाय के लिए आपको थोड़े धैर्य की जरूरत है। साथ ही अपनी डायट में हरी सब्जियां, फल और प्रोटीन से भरपूर आहार को शामिल करना न भूलें।

grey hair in hindi
    
जी हां, यह पुराने जमाने की औषधि आलू के छिलके को उतारकर बनाई जाती है। यह आजमाया हुआ नुस्‍खा है जो कि बालों को सफेद होने से बचाने के साथ ही बालों के रोम को भी स्वस्थ रखता है। आलू के छिलके में मौजूद स्टार्च बालों की रक्षा करता है।

आलू के छिलके के हेयर मास्क में विटामिन ए, बी और सी होता है, जिससे यह स्‍कैल्‍प पर जमे तेल को हटाकर इसे साफ करते हैं, परतदार डैंड्रफ को हटाते हैं, रोम छिद्रों को खोलते हैं और नए बालों के रोमों को बढ़ाते हैं। इतना ही नहीं आलू में आयरन, जिंक, पोटेशियम और कैल्शियम जैसे कई मिनरल्स पाये जाते हैं जिससे बालों का गिरना कम होता है और बाल बढ़ते हैं। आलू में मौजूद स्टार्च एक प्राकृतिक कलर के रूप में काम करता है, यह ना केवल बालों को सफेद होने से रोकता है बल्कि यह चमक भी प्रदान करता है।


पैक बनाने के लिए सामग्री

  • आलू का छिलका- 3 या 4
  • लैवेंडर का तेल (इच्छानुसार)- कुछ बूंदें

बनाने का तरीका

  • 3-4 आलू लेकर, उनके छिलके उतार लें।
  • फिर इनके छिलके लेकर, एक कप ठंडे पानी में डालें।
  • इसे पैन में डालकर, अच्‍छे से उबालें।
  • जब यह पूरी तरह उबल जाए, तो इसे 5 से 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाएं।
  • फिर इस मिश्रण को थोड़ी देर के लिए ठंडा होने के लिए रख दें। फिर इसे जार में भरें।
  • इसकी तीखी गंध से छुटकारा पाने के लिए आप कुछ बूंद लैवेंडर ऑयल डाल सकते हैं।  

इस्तेमाल करने का तरीका

इस मिश्रण को यदि साफ और गीले बालों में लगाया जाये तो आलू के छिलके का पानी ज्यादा बेहतर असर करता है। आलू के छिलके के इस मिश्रण को आप स्‍कैल्‍प पर धीरे-धीरे लगाकर, थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। अपने बालों की 5 मिनट मसाज करें और फिर 30 मिनट तक इसे ऐसे ही छोड़ दें। अगर मिश्रण कुछ देर बालों में रहता है तो शानदार तरीके से काम करता है। इसके बाद इसे ठंडे पानी से धो लें।

आलू का ये प्रयोग आजमाइए और अपने बालों को सफेद होने से बचाइए!

Friday, 10 February 2017

होंठ फटने के कारण – Cracked Lips


होंठ फटने से सिर्फ चेहरे की सुंदरता ही नष्ट नहीं होती है बल्कि खाने पीने में और बातचीत करने में भी परेशानी होने लगती है। ज्यादातर सर्दी
के मौसम में यह परेशानी बढ़ जाती है। बार बार जीभ से होंठ गीला करने की इच्छा होती है पर ऐसा करने से कुछ मिनटों के लिए ठीक लगता
है फिर परेशानी होने लगती है। होंठ फटने के कई कारण हो सकते है। कुछ सामान्य कारण ( Hoth fatne ke ) इस प्रकार है :

होठ चाटना , चबाना या काटना


होठ जब भी थोड़े सूखे महसूस  होते है तो उन्हें चाट कर गीला करने की इच्छा होने लगती है। होठों पर जीभ फिराने के कुछ मिनट बाद ही
वापस  होठ सूखे महसूस होने लगते है। फिर उन्हें नम करने की इच्छा होती है। फिर से ऐसा करना पड़ता है और यह लगातार चलता रहता है।
परंतु इससे समस्या कम नहीं होती बल्कि ज्यादा बढ़ जाती है। इससे होठ ज्यादा सूखने लगते है।

होंठ फटना

होठो पर एक सूखी परत सी बन जाती है। इस परत को कुछ लोग दांत से काट कर निकलने की कोशिश करने लगते है। कुछ लोगों की
आदत होती है वे बार बार होठो को दांतों से हल्का हल्का चबाते रहते है। ये सभी हरकतें होठो के लिए नुकसान देह होती है।

होंठ के ऊपर जीभ फिराने से लार की एक परत बन जाती है। लार में एमिलेज़ और माल्टीज़ नामक पाचक एंजाइम होते है।
ये एंजाइम होठो की पतली और नाजुक परत को नुकसान पहुंचाते है। जहाँ सामान्य त्वचा  16 परतों से बनी होती है वहीं होंठ की त्वचा में
सिर्फ 4 -5 परत ही होती है। होठों की परत के पतली होने के कारण ही होठो का रंग गुलाबी दिखाई देता है जो असल में नीचे की परत में
मौजूद रक्त से भरी केशिकाओं के कारण दिखाई देता है। लार में मौजूद बेक्टिरिया जो वैसे तो नुकसानदेह नहीं होते लेकिन ये होठों को
नाजुक और पतली परत के कारण नुकसान पहुंचा सकते है । अतः यदि होंठ चबाने , चाटने या काटने की बुरी आदत हो तो इसे तुरंत छोड़
देना चाहिए।

होठो का बचाव नहीं करना


होठो का तेज हवा से और धूप से बचाव बहुत जरुरी होता है। कई बार चेहरे पर तो सनस्क्रीन या लोशन आदि लगा लिए जाते है , लेकिन होठों
पर कुछ नहीं लगाया जाता। होठों पर ना तो सिबेशस ग्रंथियां होती है , और ना ही हेयर फॉलीकल होते है । इस वजह से सामान्य त्वचा की
तरह इनको नमी नहीं मिल पाती। इसके अलावा होठो की त्वचा में दूसरी त्वचा की तरह मेलेनिन भी  नहीं होता , जिस पर त्वचा का रंग निर्भर
करता है। मेलेनिन त्वचा को धूप की हानिकारक अल्ट्रा वॉइलेट किरणों से बचाता है। होठों  पर मेलेनिन नहीं होने के कारण यहाँ की त्वचा के
अल्ट्रा वॉइलेट किरणों से नुकसान की अधिक संभावना होती है। अतः जरुरत के अनुसार होठों का बचाव किया जाना जरुरी होता है।

रूखी ( Dry ) हवा में इसका ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। सर्दी में मौसम में हवा रूखी ( Dry ) होने के कारण होठ ज्यादा फटते है। कमरे में
चलने वाले हीटर से भी हवा रूखी हो जाती है जो होंठ फटने का कारण बन सकता है। ऐसे में बचाव नहीं किये जाने से होठ फट जाते है।
अतः लिप बाम , वैसलीन , सरसों के तेल , मलाई , घी आदि का उपयोग होठो पर लगाने के लिए करना चाहिए। इससे होठ मुलायम बने रहते
है ,फटते नहीं है।

मुंह से साँस लेना


मुंह से साँस लेना कभी मजबूरी  होती है तो कभी आदत। जुकाम लगने पर नाक बंद हो जाती है ऐसे में मुंह से सांस लेने में आती है। छोटे बच्चों
के साथ अक्सर ऐसा होता है। इसके अलावा जो लोग खर्राटे ज्यादा लेते है उनका मुंह खुला रहता है और वे साँस मुंह से लेते है । बार बार साँस
की हवा का होठो पर से गुजरना होठो की नमी छीन लेता है और होठ सूख कर फटने लगते है। इसलिए ज्यादा खर्राटे लेने वाले लोगों के होठ
सूखे हुए रहते है। अतः ऐसी समस्याओं का इलाज जल्द कर लेना चाहिए। कभी कभी मुंह से साँस लेने की आदत सी हो जाती है इसे तुरंत छोड़ना चाहिए।

कुछ विशेष तत्व


टूथपेस्ट में ऐसे तत्व हो सकते है जो होठो में सूखापन ला सकते है। यदि आपको ऐसा महसूस हो तो टूथपेस्ट बदल लेना चाहिए। इसके अलावा
और भी कोई उत्पाद ऐसा हो जिसे काम में लेने पर होठों में सूखापन  लगे तो उसे बदलना चाहिए। खट्टे फल का एसिड होठो को सुखा सकता
है। टमाटर की सॉस , च्युइंग गम , कैंडी आदि में इस्तेमाल होने वाले सिनेमेट्स भी ऐसे तत्व हो सकते है जो होठों के सूखेपन के लिए जिम्मेदार
हो सकते है।

पानी की कमी


यदि शरीर में पानी की कमी होती है तो  इसका असर होठों पर तुरंत नजर आता है। पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने पर होंठ सुख जाते है। ऐसे
में हवा से या धूप से होठों का सूखापन और बढ़ सकता है। गर्मी  के मौसम में पानी कम पीने के कारण होठ सूख कर फट सकते है। अतः पानी
पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए।

विटामिन बी व आयरन की कमी


विटामिन बी की कमी के कारण होठ सूखने की समस्या पैदा हो सकती है। इसके अलावा होठ फटने का  कारण आयरन या फोलेट की
कमी भी हो सकता है। रक्त की जाँच से कमी का पता चलने पर डॉक्टर की सलाह से दवा लेने पर ये ठीक हो सकते है। अक्सर होठो के
किनारे फटने का कारण आयरन की कमी होता है जिसका अंदाज नहीं लग पाता , इसलिए रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा अवश्य चेक
करवा लेनी  चाहिए।

एलर्जी


कभी कभी मल्टी विटामिन के कुछ तत्व की एलर्जी के कारण होंठ सूखने की परेशानी पैदा हो सकती है। लिपस्टिक के कुछ तत्व एलर्जी पैदा
कर सकते है। इसी तरह खाने पीने के किसी विशेष वस्तु से या खाने में डाले जाने वाले रंग से एलर्जी के  कारण होंठ सूख सकते है। ऐसे में
इनका प्रयोग नहीं करना ही उचित होता है। यदि समस्या ज्यादा हो तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बीमारी और दवाएं


थायराइड , सिरोसिस , डायबिटीज आदि बीमारियों  के होने से होंठ फटने की समस्या हो सकती है। कुछ अन्य बीमारी के कारण भी होंठ
फटना या उनमे जलन सूजन आदि हो सकते है। कभी कभी कुछ दवाएं जैसे झुर्रियों या एक्ने , ब्लड प्रेशर आदि की दवा के कारण भी होंठ
सूख कर फटने लगते है । यदि लंबे समय तक इस प्रकार की परेशानी बनी रहे तो डॉक्टर से परामर्श  जरूर कर लेना चाहिए।

होंठ के किनारे फटना या चिरना


होठो का किनारे ( जहाँ दोनों होंठ जुड़ते है ) की तरफ से कटना , किनारे से चिरना या होठों के किनारे पर सूजन या जलन आदि होना फंगल
इन्फेक्शन या  बेक्टिरिया  आदि  के कारण हो सकता है। ये बेक्टिरिया या फंगस लार में मौजूद होते है।  हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली यदि मजबूत
होती है तो इनसे कुछ नुकसान नहीं होता। लेकिन प्रतिरक्षा तंत्र के  कमजोर होने तथा मुंह पर चोट या खरोंच आने से या ज्यादा लार या थूक
किनारे पर इकठ्ठा होने से ये बेक्टिरिया तेजी से बढ़ने लगते है । इस वजह से वहाँ संक्रमण दिखाई देता है।  प्रतिरक्षा तंत्र के कमजोर होने का
कारण बीमारी  या तनाव की स्थिति हो सकती है।



इसके अलावा होठों पर बेक्टिरिया के  संक्रमण होने के और भी कई कारण हो सकते है जैसे गंदे हाथ होठों पर फेरना , पेन पेंसिल या नाख़ून
चबाना , खाना खाते समय या सोते समय ज्यादा लार निकलना। होठों पर ख़राब गुणवत्ता के बाम , लिपस्टिक , लिप ग्लॉस आदि लगाना।
खून की कमी  होने पर भी होठों के किनारे फटने लगते है , रक्त की जाँच करवाने से इसका पता चलता है।

फटे होंठ के कारण जलन सूजन आदि हो सकते है। यदि होंठ लंबे समय तक फटे रहें या किनारों पर जलन सूजन या बहुत अधिक दर्द या
एलर्जी जैसा दिखे तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

 क्या चुम्बन होंठ फटने का कारण हो सकता है


मुंह में मौजूद नुकसान नहीं करने वाले बेक्टिरिया भी होठों को नुकसान पहुंचा सकते है । लार में मौजूद पाचक एंजाइम जैसे एमिलेज़ और
माल्टीज़ होठों की पतली परत को ख़राब करते है। जब भी होंठो पर लार की परत बनती है , होठो को नुकसान होता है। चुम्बन ( kiss ) के
समय होठों पर लार की परत बनती ही है। कुछ माता पिता छोटे बच्चों को प्यार जताने के लिए उन्हें होठो पर चुंबन देते है। इससे नुकसान हो
सकता है।  चुम्बन से पहले अक्सर होठों पर जीभ फेरकर उन्हें नम बनाया  जाता है। छोटे से चुम्बन के समय  भी लार होंठ पर आ ही जाती है।
और पुरुष महिला के आवेशपूर्ण कामुक चुम्बन के समय तो होंठ लार से भर जाते है। इससे बहुत नुकसान हो  सकता है।
हालाँकि कुछ विशेषज्ञ चुम्बन के अनेक फायदे भी बताते है।

होंठ फटने पर घरेलु नुस्खे – Gharelu Nuskhe For Lips


—  सुबह तथा रात को सोते समय नाभि को साफ करके उसमे गुनगुना सरसों का तेल लगाने से होंठ मुलायम होते है और फटने बंद हो
जाते है।

—  सर्दी के  कारण फटे होंठ ठीक करने के लिए दूध की मलाई में बारीक हल्दी पाउडर मिलाकर सुबह शाम हल्के हाथ से थोड़ी मालिश
होठो का फटना मिट जाता है।

—  बादाम का तेल रोजाना सुबह शाम होठो पर लगाने से होंठ फटना ठीक होता है।

—  होंठ काले और सूखे हो गए हों तो गुलाब के फूल की ताजा पत्तियां पीस कर इसमें ग्लिसरीन मिला लें। लिपस्टिक का उपयोग बंद करके
इसे नियमित रूप से होठो पर लगाने से होंठ सुन्दर गुलाबी हो जाते है।

—  छाछ से निकले मक्खन में केसर मिलाकर होठों पर लगाने से होंठ गुलाबी और मुलायम होते है।

—  घी में जरा सा नमक मिलाकर सुबह शाम होठो पर और नाभि में लगाने से होंठ फटना बंद होता है।

—  सरसो के तेल में बारीक हल्दी पाउडर मिलाकर सुबह शाम होठों पर और नाभि में लगाने से होंठ फटने बंद होते है।

Categories

Popular Posts