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Friday, 10 February 2017

नाख़ून -Nails


नाख़ून स्तनधारियों की पहचान है। यह कठोर पारदर्शी प्रोटीन केराटिन से बना होता है। बाल भी इसी प्रोटीन से बने होते है। यह प्रोटीन
मृत कोशिकाओं से बनता है। नाखुन का काम अँगुलियों को चोट आदि से बचाना होता है। यह सौन्दर्य बढ़ाने में भी योगदान देता है।
अँगुलियों के नाखुन एक महीने लगभग  4  मिलीमीटर तक बढ़ सकते है तथा  पैर के नाखुन एक महीने में लगभग 2 मिलीमीटर  बढ़ पाते है।

नाख़ून

नाख़ून की सुंदरता व रख रखाव के कई व्यापार चल रहे है जैसे नेल पोलिश , नेल आर्ट , नेल क्रीम , क्यूटिकल क्रीम , मेनिक्योर आदि। नाखुन
के विभिन्न शेप देकर तथा नेल पोलिश , नेल आर्ट से सजा कर सौन्दर्य में वृद्धि की जा सकती है। नाखुन को मेनिक्योर से साफ व सुंदर रखा जा
सकता है।  इसके लिए पार्लर में महँगे रासायनिक तत्वो के उपयोग के बजाय घर पर ही नियमित मेनिक्योर आदि करने से नाखुन को
नुकसान नहीं होता और परिणाम अच्छा मिलता है। 

नाख़ून कैसे बनता है

नाख़ून सिर्फ वह नहीं जो दिखाई देता है। जो दिखाई देता है वह नेल प्लेट कहलाता है। इसके नीचे नेल बेड होता है जो सामान्य त्वचा जैसा ही होता है। नेल बेड के नीचे नेल मेट्रिक्स होता है। नेल मेट्रिक्स पर ही नाख़ून का बनना और उनका आकार निर्भर करता है। नेल मेट्रिक्स
को मिलने वाले पोषक तत्व ही नाख़ून के हेल्थी या कमजोर होने के लिए जिम्मेदार होते है।

नाख़ून


नाख़ून पर बुरा प्रभाव पड़ने के कारण


नाख़ून के बढ़ने तथा अच्छे होने या ना होने के अनेक कारण होते है। वातावरण के तापमान का भी नाख़ून पर प्रभाव पड़ सकता है।
सामान्यतया गर्मी के मौसम में नाख़ून व बाल जल्दी बढ़ते है और सर्दी में धीरे धीरे बढ़ते है। पोष्टिक भोजन की कमी , डिप्रेशन , किसी रोग
की वजह से या संक्रमण आदि होने के कारण भी नाखुन धीरे बढ़ते है तथा उनका लुक ख़राब हो सकता है।

पानी तथा दैनिक उपयोग के साफ सफाई के साधन जैसे साबुन या बर्तन धोने का लिक्विड आदि में हाथ ज्यादा समय रहने से नाखुन का
सौन्दर्य चला जाता है। किसी प्रकार की चोट या रगड़ आदि के लगने से नाखुन कट फट जाते है।

जहाँ नाख़ून और त्वचा मिलते है उस जगह को क्यूटिकल कहते है। ये क्यूटिकल संक्रमण होने से बचाते है , तथा बेक्टिरिया आदि को अंदर
प्रवेश नहीं होने देते। इसीलिए क्यूटिकल का भी ध्यान रखना चाहिए अन्यथा इनमे फंगल इन्फेक्शन हो सकता है।

नाख़ून देखकर बीमारी का अंदाजा लगाएँ


नाखून का रंग , मोटाई या आकार में होने वाले परिवर्तन को किसी शारीरिक समस्या या रोग का संकेत समझा जाता है। किस परिवर्तन से
कौनसे रोग का अंदाजा लगाया जाता है इस बारे में  यहाँ कुछ संकेत बताये जा रहे जो सतर्क होने के लिए जानकारी है।  किसी भी नतीजे पर
पहुँचने के लिए चिकित्सक का परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

— नाखुन यदि पीले व फीके हो रहे है  तो सम्भावना है कि आप कुपोषण , एनीमिया , लिवर प्रॉब्लम , पीलिया ,फंगल इन्फेक्शन , मधुमेह ,
थायरॉइड , सिरोसिस आदि में से किसी समस्या से ग्रस्त हों ।

—  नाखुन सफ़ेद हो गए हों सिर्फ आगे एक बारीक लकीर गुलाबी रह गई हो तो यह हेपेटाइटिस जैसी लिवर समस्या को दर्शाता है।

—  नाख़ून जल्दी जल्दी टूट रहे है ओर सूखे महसूस हो रहे है तो यह थायरॉइड का संकेत हो सकता है। या हो सकता है आप केमिकल ज्यादा
उपयोग में ले रहे है जैसे नेल पोलिश , साबुन या सर्फ।
—  रूखे बेजान नाखुन विटामिन सी , फॉलिक एसिड , ह्रदय रोग या रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी के कारण हो सकते है।

—  यदि नाखुन नीले पड़  रहे है तो ऑक्सीजन की कमी , निमोनिया ,फेफड़ो में इन्फेक्शन हो सकता है।

—  ज्यादा उभरे हुए नाखुन दर्शाते है , कि ऑक्सीजन का प्रवाह सही ढंग से नहीं हो रहा या ऑतो या फेफड़ो में सूजन हो सकती है।

—  यदि आपके नाखुन बीच में सा दबकर चम्मच जैसे हो गए है तो यह आयरन की कमी को दर्शाता है।

— नाख़ून पर बनने वाली लकीरें प्रोटीन की कमी के कारण हो सकती हैं।

—  नाखुन में सफेद लाइन व सफेद धब्बे लिवर या ह्रदय रोग की और संकेत हो सकता है।

नाख़ून आकर्षक और स्वस्थ रखने के लिए क्या खाएँ


यदि आप स्वस्थ है और पोष्टिक भोजन ले रहें है तो नाख़ून खूबसूरत , गुलाबी और चमकीले नजर आएंगे।

हरी पत्तेदार सब्जियों से  विटामिन ए , सी , इ , के और बी कॉम्प्लेक्स मिलते है। इसके अलावा कैल्शियम , मैग्नेशियम और पोटेशियम के
ये अच्छे स्रोत होते है। इनमे बायोटिन , आयरन प्रोटीन भी मिलते है। इन सबसे नाख़ून आकर्षक और मजबूत होते है। अतः हरी पत्तेदार
सब्जियों को अपने आहार में पर्याप्त स्थान दें।

दूध , दही ,अंकुरित अनाज से कैल्शियम तथा कई प्रकार के नाख़ून के लिए आवश्यक पोषक तत्व  मिलते है। इनका उपयोग करें।
इसके अलावा सूखे मेवे जैसे बादाम , अख़रोट , किशमिश और फल जैसे आम , अनार , केला , संतरा ,आँवला आदि का भरपूर उपयोग करें।

शकरकंद , गाजर , कददू आदि में विटामिन ए , प्रोटीन , बायोटिन तथा ओमेगा -3 फैटी एसिड होने की वजह से नाख़ून के लिए ये बेहतर
पोष्टिक भोजन साबित होते है। इन्हें अवश्य लें।

नाख़ून मजबूत , चमकीले करने तथा बढ़ाने के घरेलु नुस्खे


—  कमजोर व पीले  नाख़ून के लिए रुई के फाहे से नींबू का रस लगाए या नींबू  का छिलका रगड़े थोड़ी देर बाद साफ पानी से हाथ धो ले ,
कुछ ही दिन में नाख़ूनो में कुदरती चमक व मजबूती आ जायेगी।

—  नाख़ून के आस पास की क्यूटिकल व त्वचा कड़क गई हो , पक गई हो या कोई संक्रमण हो गया तो नींबू के हरे पत्ते पीस कर थोड़ा सा
नमक मिलाकर लगाए पंद्रह दिन में ही फर्क पड़ जाएगा।

—  नाख़ून सख्त दिखते हुए भी ऑक्सीजन लेते है जो नेल बेड तक पहुँचती है। अतः लगातार नाख़ून पर नेल पोलिश लगाकर रखने से और
बार बार केमिकल से नेल पोलिश साफ करने से नाख़ून कमजोर और फीके हो जाते है।

—  नाखुनो को गुनगुने पानी में पाँच मिनट डुबोने के बाद गुनगुने जैतून के तेल से हल्की मालिश करे।

—  नाखुन कटना फटना , बदरंग होना , मोटे होना आदि समस्या के छुटकारे के लिए 100 ग्राम चुकन्दर का रस रोज पिएँ।

—  आयरन , विटामिन डी व कैल्शियम की पूर्ति के चुकुन्दर का सलाद नियमित रूप से लें ।

—  गर्म पानी में नमक मिलाकर 10 मिनट तक रोजाना एक महीने तक सेक करने से नाखुन बढ़ने लगते है।

— नाखुन टूटे,फटे या त्वचा से अलग हो रहे हो तो सरसो के गुनगुने तेल में दस मिनट के लिए डुबो कर रखे व बाद मे हल्के हाथ से मालिश
करे।

—  नाख़ून पर लहसुन की कली को थोड़ा पीस कर कुछ देर घिसे कुछ दिनों मे ही नाख़ून बढ़ने लगेंगे।

—  नाखुनो का रुखापन दूर करने के लिए मक्खन या पेट्रोलियम जेली से मालिश करे।

—  नाखूनो का फीकापन दूर करने के 10 ग्राम काली किशमिश को धोकर एक कप  पानी में रात को भिगोकर सुबह किशमिश को अच्छी
तरह चबा चबाकर खाये व कप वाला पानी पी  ले। एक महीने तक इसका प्रयोग करने पर नाखून के साथ त्वचा की रंगत में भी फर्क अवश्य
पाएंगे।

—  हाथो की नमी बनाये रखने के लिए मॉइश्चराजर या नारियल का तेल नियमित रूप से लगाना चाहिए।

—  डार्क कलर की नेलपोलिश लगाने से पहले प्राइमर कोट अवश्य लगाए।

—  नेल रिमूवर से घिस कर नेल पेंट साफ नहीं करना चाहिए। एक रुई के फाहे में नेल रिमूवर लेकर नाख़ून पर रखे व हल्के हाथ से नेल
पॉलिश साफ करे।

—  घर के काम विशेष कर बर्तन साफ करने के लिए दस्तानो का इस्तेमाल करे।

—  नाखुनो का प्रयोग किसी भी जगह को खुरचने में  या डिब्बे आदि को खोलने के लिए न करे।

—  पैर के नाख़ून ख़राब होने से बचाने के लिए सूती मोज़े ही पहनें। गीले व टाइट जूते चप्पल नहीं पहनें।

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