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Monday, 9 May 2016

1. सिर का दर्द : अगर बच्चे के सिर में दर्द होता है तो बच्चा बार-बार अपनी आंखें बंद कर लेता है। इसके अलावा वह अपने सिर को एक जगह टिकाकर नहीं रखता, उसकी गर्दन नीचे की तरफ ही झुकी रहती है वह सिर को धुनता रहता है और जगह-जगह टक्करें मारता रहता है। सिर में दर्द होने से सिर की चमड़ी बिल्कुल सिकुड़ सी जाती है। बच्चे का हाथ बार-बार सिर में ही जाता रहता है और वह अपने कान भी खींचता रहता है।
2. मूत्राशय की परेशानी : अगर बच्चे के मूत्राशय में दर्द होता है तो बच्चा पेशाब रुकने से बहुत दुखी रहता है और इसी कारण कुछ खाता-पीता भी नहीं है।
3. दर्द : बच्चे के कम या ज्यादा रोने से उसके तकलीफ (दर्द) समझा जा सकती है। अगर बच्चा कम रोता है तो समझ लेना चाहिए कि बच्चे को तकलीफ (दर्द) कम है और अगर बच्चा रोता ही रहे और जोर-जोर से चिल्लाए तो समझ जाना चाहिए कि बच्चे को तकलीफ (दर्द) ज्यादा है।
4. दिल का रोग : अगर बच्चा अपने होंठ और जीभ को दांतों से काटे और मुटि्ठयों को भींचे तो समझ जाना चाहिए कि बच्चे के हृदय (दिल) में दर्द है।
5. पेडू का दर्द :अगर बच्चे का पाखाना-पेशाब (टट्टी-पेशाब) बंद हो तथा वह उल्टी दिशाओं को देखें तो उसकी वस्ति, पेडू और गुदा में दर्द समझ लेना चाहिए।
अगर बच्चे को पेशाब न आ रहा हो और बार-बार प्यास लगे और बच्चे को बेहोशी छा रही हो तो बच्चे के पेड़ू में दर्द समझ लेना चाहिए। पेट का दर्द : अगर अच्छा स्वस्थ बालक रह-रहकर बार-बार रो उठे, तो समझो उसके पेट में दर्द हो रहा है।
6. प्यास का रोग : दूध पीने वाले बच्चे को जब प्यास लगती है, तब वह अपनी जीभ बाहर निकलता है।
7. जुकाम : जब बच्चे को जुकाम होता है और उसकी नाक बंद हो जाती है, तो वह मुंह से सांस लेने के लिए, दूध पीते-पीते बार-बार स्तन को छोड़ देता है और सांस लेकर फिर दूध पीने लगता है।
8. सांस की परेशानी : अगर सांस लेते समय बच्चे की नाक का छेद बड़ा हो जायें और नाक हिले, तो समझना चाहिए कि बच्चे को सांस लेने में बड़ी परेशानी हो रही है और उसको खांसी से बड़ी तकलीफ है।
9. बुखार : अगर पता करना है कि बच्चे को कितना बुखार है तो बच्चे के मुंह में थर्मामीटर लगाना चाहिए। बालक की नाड़ी (नब्ज) स्वभाव से ही बहुत तेज चला करती है, इसलिए नाड़ी की चाल (नब्ज चलने की रफ्तार) से धोखा होने का डर रहता है जो जानने वाले अनुभवी वैद्य होते हैं, वह तो धोखा नहीं खाते, पर जो नौसिखिये (न जानने वाले) होते हैं वे धोखा खा जाते हैं। थर्मामीटर से किसी तरह का धोखा नहीं हो सकता है।
10. जिगर का रोग : बच्चों का पेट स्वभाव से ही कुछ बड़ा होता है। अगर पेट कुछ ज्यादा ही बड़ा हो तो समझ लेना चाहिए कि बच्चे को यकृत (जिगर) या प्लीहा का रोग है अथवा अजीर्ण है। कुछ भी रोग हो पहले अच्छी तरह पता करके कि बच्चे को रोग क्या है फिर दवा देनी चाहिए।

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