मानसिक तनाव – Stress
मानसिक तनाव , stress या दबाव थोड़ा बहुत हो तो आपके लिए फायदे मंद हो सकता है क्योकि इससे आपकी कुशलता बढ़ जाती है। आप
अपनी सम्पूर्ण क्षमता से कार्य करते है। यह आपको खतरे के समय सुरक्षित भी करता है। सामान्य तनाव या दबाव सावधान रहने तथा
ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। आपातकालीन परिस्थिति में इसके कारण जान बच सकती है। तनाव और दबाव के कारण खेलते वक्त
जीतने का हौसला और अच्छी परफोर्मेंस मिलते है । इसी प्रकार ऑफिस में कोई प्रेजेंटेशन आदि देते समय यह आपकी ताकत बढ़ा देता है।
लेकिन यदि तनाव अधिक हो जाता है तो इससे गंभीर मानसिक और शारीरिक नुकसान होने लगते है। आजकल की भागदौड़ और
कशमकश भरी जिंदगी में पता ही नहीं चलता की तनाव कब हम पर हावी हो जाता है। तनाव के लक्षण और कारण को पहचान कर तथा
उसके अनुसार कुछ परिवर्तन लाकर इससे होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

जब भी खतरे का अहसास होता है तो हमारे शरीर में कुछ विशेष प्रकार के हार्मोन एड्रेनलिन और कोर्टिसोल का स्राव होता है। ये हार्मोन
शरीर में किसी भी प्रकार के खतरे से बचने के लिए अलग प्रकार की ताकत पैदा कर देते है। इसके कारण ह्रदय की धड़कन बढ़ जाती है ,
मांसपेशियाँ भिंच जाती है। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। साँस तेज हो जाती है। इन्द्रियों की शक्ति बढ़ जाती है। इन सब परिवर्तन से पैदा होने
वाली शक्ति जान बचाने में काम आती है। इसकी मदद से भाग कर या किसी और तरीके से जान बचायी जा सकती है। यह प्रकृति की अपनी
व्यवस्था है।
इस व्यवस्था की मुश्किल यह है कि शरीर रोजाना के सामान्य तनाव और जान के खतरे वाले तनाव में अंतर नहीं कर पाता। हमें परेशानी में
पाते ही एड्रेनलिन और कोर्टिसोल हार्मोन अपना काम करना शुरू कर देते है। जैसे यदि बस या ट्रैन पकडनी है तो तनाव होता है और हार्मोन
की मदद मिलनी शुरू हो जाती है। किसी से थोड़ी बहस हो जाये या ट्रैफिक जाम में फंसने के कारण टेंशन हो रही है तो हार्मोन का स्राव शुरू
हो जाता है। मंच पर पहली बार कुछ बोलना हो या इंटरव्यू हो तब stress के कारण ऐसा हो सकता है। इस प्रकार की साधारण स्थितियों में
भी शरीर में ऐसे परिवर्तन होने लगते है जैसे जान का खतरा हो।
मानसिक तनाव ( stress ) के कारण होने वाले नुकसान
कृपया ध्यान दें : किसी भी लाल रंग से लिखे शब्द पर क्लीक करके उस शब्द के बारे में विस्तार से जान सकते है।
लंबे समय तक स्ट्रेस बने रहने पर कई प्रकार की शाररिक और मानसिक परेशानियां पैदा हो सकती है।
इन हालात में शरीर के प्रत्येक अंग को नुकसान पहुंच सकता है। ये मानसिक तनाव के लक्षण भी है। यदि आप भी कुछ ऐसा महसूस करते
हों तो देखना चाहिए कही टेंशन के कारण तो ऐसा नहीं हो रहा है।
मानसिक तनाव stress से शरीर को नुकसान –
प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है। पाचन तंत्र गड़बड़ा सकता है। प्रजनन की कार्यप्रणाली बिगड़ सकती है। पुरुषों में शुक्राणु की कमी हो
सकती है। महिलाओं को मासिक धर्म के समय परेशानी बढ़ सकती है। ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है , ह्रदय रोग हो सकता है , साँस लेने में
परेशानी हो सकती है । शरीर में दर्द , सिर में दर्द , माइग्रेन , कब्ज या दस्त , भूख बंद होना , जी मिचलाना , चक्कर आना , यौन सम्बन्ध से
अरुचि , सीने में दर्द , ह्रदय की धड़कन बढ़ना ,बार बार सर्दी जुकाम , वजन बढ़ना या गिरना ,ऑटो इम्यून डिज़ीज , एग्जीमा , समय से पहले
उम्र झलकना आदि हो सकते है।
तनाव stress से मानसिक परेशानी –
डिप्रेशन , चिंता , दुखी रहना , गुस्सा , चिड़चिड़ापन , अपराधग्रस्त महसूस करना , आत्महत्या के विचार आना , घबराहट , निराशा होना।
मानसिक तनाव ( stress ) के कारण
मानसिक तनाव ( stress ) का कारण खुद के द्वारा पैदा किया हुआ भी हो सकता है या किसी बाहरी कारण से भी तनाव हो सकता है :
मानसिक तनाव के बाहरी कारण
— जिंदगी में कोई बड़ा बदलाव
— ऑफिस , दुकान या स्कूल की कोई परेशानी
— व्यापार संबंधी परेशानी
— रिश्ते या संबंधों के कारण तनाव
— आर्थिक परेशानी
— बहुत ज्यादा व्यस्त रहना
— परिवार के सदस्यों का साथ नहीं मिल पाना

मानसिक तनाव खुद के कारण
— ज्यादा सोच विचार और चिंता करने की आदत
— निराशावादी होना
— जिद्दी और अकड़ वाला स्वभाव
— खुद की हीनता के बारे में बोलना या सोचना
— खुद को नाकाबिल समझना
— किसी से ऐसी आशा रखना जो पूरी नहीं हो सकती या ऐसा कुछ चाहना।
— या तो सब कुछ चाहिए या कुछ नहीं चाहिए इस प्रकार का स्वभाव होना।
मानसिक तनाव ( stress ) से होने वाले नुकसान से बचने के उपाय
— व्यायाम या कसरत :
नियमित रूप से कुछ एक्सरसाइज करने से मन अच्छा रहता है और तनाव से राहत मिलती है। चिंता फ़िक्र और निराशावादी माहौल से दूर
होकर शांति का अहसास होता है। यह तनाव झेलने की क्षमता में वृद्धि करता है। तनाव दूर करने का यह अच्छा तरीका है। पैदल घूमना ,
दौड़ना , तैरना , रस्सी कूदना , डांस करना या एरोबिक एक्सरसाइस करना जैसे बहुत से विकल्प है जिन्हें अपनी पसंद से अपना सकते है।
इनसे तनाव को दूर रखने में बहुत मदद मिलती है।
— सामाजिक सम्बन्ध
कहते है दुःख बाटने से दुःख कम हो जाता है। किसी से भी अपनी मन की बात कह देने भर से तनाव को कम करने के हार्मोन बनने लगते है।
सांत्वना के दो शब्द भी कोई कहे तो मन बहुत हल्का हो जाता है। किसी की मदद करने से भी बहुत ख़ुशी मिल सकती है। आशा फिल्म का यह
गाना ” तुम बेसहारा हो तो , किसी का सहारा बनो…तुमको अपने आप ही सहारा मिल जायेगा ” बहुत अच्छा और सही लिखा गया है। यानि
आप यदि तनाव में है या दुखी है तो किसी का दुःख दूर करने में मदद करने से आपका भी tension दूर हो सकता है।
इससे सामाजिक रूप से भी लोगों से जुड़ाव होता है जो तनाव , tension दूर करने में सहायक होता है। जिन लोगों के सामाजिक सम्बन्ध अच्छे
होते है और जो लोग दोस्तों और रिश्तेदारों या पड़ोसियों से अपने विचार या भावनाएं बाँटने में है , उनकी तनाव झेलने की क्षमता अधिक होती
है। अकेले और अलग रहने वाले लोगों को तनाव आसानी से अपना शिकार बना लेता है।
— अपनी रूचि और शौक वाले काम
हर इंसान को अलग तरह का शौक होता है जिसमे उसे आनंद की प्राप्ति होती है। यह तनाव दूर करने का अच्छा उपाय साबित हो सकता है।
जैसे अपनी पसंद का संगीत सुनना। किसी म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट को बजाना जानते हों तो उसे काम में लें। किसी विशेष खेल जैसे बेडमिंटन ,
टेनिस , केरम आदि में रुचि हो तो उसमे हिस्सा बने । बागवानी का शौक हो तो उसे पूरा करें। पेंटिंग , बुनाई , क्राफ्ट आइटम बनाना जैसे
बहुत से विकल्प हो सकते है।
— योगासन और ध्यान
देश विदेश में योगासन और मैडिटेशन की मदद से बहुत से लोग अपना तनाव दूर कर रहे है। यह बहुत कारगर सिद्ध होता है। किसी अनुभवी
व्यक्ति से योगासन और मैडिटेशन सीखकर इसका अभ्यास करने से अवश्य लाभ मिलता है।
— पोष्टिक भोजन
कहते है – ” जैसा खाये अन्न , वैसा होए मन ” यानि खाने पीने का शरीर के अलावा मन पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। ताजा फल , सब्जी , दूध ,
दही , मेवे चोकर युक्त अनाज आदि विटामिन और प्रोटीन से भरे खाद्य पदार्थ भोजन में शामिल करने से मानसिक दृढ़ता हासिल होती है।
इनसे तनाव कम होता है और जीवन के उतार चढाव में घबराहट नहीं होती है।
पोष्टिक भोजन लेने का ये मतलब नहीं की आप अपने पसंद की कोई भी चीज नहीं खा सकते। लेकिन पौष्टिकता का ख्याल रखते हुए भोजन
करने से शरीर को ताकत मिलती है जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी जरुरी है। इससे संतृप्ति का अहसास होकर मन को ख़ुशी मिलती है।
जबकि फ़ास्ट फ़ूड जैसे भोजन या कचोरी , समोसा , पिज़ा आदि से का स्वाद जब तक मुंह में रहता है तब तक ख़ुशी मिल सकती है लेकिन
बाद में इनसे परेशानी बढ़ती ही है।
— नींद
थकान होने पर सोचने समझने की शक्ति प्रभावित होती है इससे उलटी सीधी बातें दिमाग में आकर तनाव पैदा कर सकती है। अतः भरपूर
नींद लेने से थकान दूर होकर Tension कम होता है। नींद पूरी हो जाये इसका प्रबंध अवश्य करना चाहिए। इससे आपकी कार्यक्षमता भी
बढ़ती है और आप मानसिक रूप से मजबूत रहते है।
— नशे से दूरी
टेंशन या दबाव पर नियंत्रण पाने के लिए कुछ लोग नशे का सहारा लेने लगते है जैसे धूम्रपान , गुटखा , शराब आदि यहाँ तक कि कुछ लोग
ड्रग्स लेना शुरू कर देते है। इन सब चीजों से समस्या हल नहीं होती बल्कि बढ़ जाती है। इससे आपका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। नशे
का असर ख़त्म होने पर पर पहले से ज्यादा तकलीफ महसूस होने लगती है। आप नशे की मात्रा बढ़ा देते है। इस प्रकार नशे के चंगुल में फंस
जाते है। जिससे निकलना बहुत मुश्किल हो जाता है। आप आर्थिक और शारीरिक नुकसान को झेलते हुए खुद को असहाय पाते है। समस्या
से निकलने के बजाय एक और समस्या पैदा कर लेते है। अतः मानसिक तनाव होने पर नशे का सहारा बिलकुल न लें।
— आशा वादी रहें
आशावादी लोग ज्यादातर तनाव को ज्यादा अच्छे तरीके से सहन कर पाते है। जिंदगी में बदलाव आयेंगे ही। जो होगा अच्छा होगा और जो हुआ
अच्छे के लिए हुआ यह सोचने से Tension कम हो जाता है। छोटी मोटी चीजों को हल्के में लेना सीखना चाहिए।

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